तुम कर सकती हो

द्रोण साहू

चूल्हा जलाने से बच्चे सुलाने तक,

लोरी सुनाने से पति के बुलाने तक,

तुम वह सब कुछ कर सकती हो,

जो एक पुरुष कर सकता है,

और जिसे केवल वही,

कर सकने का दंभ भरता है |

 

धरती से लेकर अम्बर तक,

पायलट से लेकर प्लम्बर तक,

तुम वह सब कुछ कर सकती हो,

जो एक पुरुष कर सकता है,

और जिसे केवल वही,

कर सकने का दंभ भरता है |

 

प्यून से बॉस के चेम्बर तक,

आई ए एस से पार्लियामेंट के मेम्बर तक,

तुम वह सब कुछ कर सकती हो,

जो एक पुरुष कर सकता है,

और जिसे केवल वही,

कर सकने का दंभ भरता है |

 

बिज़नेस से लेकर बैंक तक,

पुलिस की सलामी से सेना के टैंक तक,

तुम वह सब कुछ कर सकती हो,

जो एक पुरुष कर सकता है,

और जिसे केवल वही,

कर सकने का दंभ भरता है |

 

उठो, अपना आत्मबल जगाओ,

अबला नाम अपने माथे से मिटाओ,

तुम चाहो तो हर मंजिल पा सकती हो,

इस धरा पर स्वर्ग ला सकती हो,

तुम हर वह भी कर सकती हो,

जो पुरुष कभी नहीं कर सकता है,

और जिसे कर सकने का,

केवल दंभ ही भरता है |



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अंक

Image Credit :- Dr. Harshjeet Singh Bal


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